मुलायम सिंह यादव का जीवन परिचय । Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi – Poetry Dukan

मुलायम सिंह यादव का जीवन परिचय | Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi – Poetry Dukan

मुलायम सिंह यादव का जन्म किसान परिवार में हुआ था वो एक भारतीय राजनेता हैं और मुलायम जी उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री के पद पर रह चुके है और केंन्द्र सरकार में एक बार रक्षा मन्त्री के पद पर भी कार्यरत रहे। वो किसानों के लिए किसान नेता रहे और उनके समर्थक उन्हें ‘नेताजी‘ बोलते थे और ‘उन्हें धरतीपुत्र‘ के नाम से भी जाना जाता है। Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi

Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi

मुख्यमंत्री पद पर रहते समय मुलायम सिंह पर कई विवाद भी रहे है जैसे, कारसेवकों पर गोली चलवाना और महिला आंदोलनकारियों का ब्लात्कार होने के मामले में आरोपी और साजिशकर्ता में नाम आना। और उत्तराखंड आंदोलन के वक्त रामपुर चौराहा कांड में आंदोलकारियों को गोलियों से भून कर मार डालना।

साल 2017 जनवरी में मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की गई, जिसमे अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को सपा प्रमुख के पद से हटा कर खुद को ही सपा पार्टी का प्रमुख घोषित कर दिया था।

मुलायम सिंह यादव ऐसे व्यक्ति थे वो कभी मानना नही जानते थे, लेकिन अपने बेटे अखिलेश यादव के कलह के चलते हुए उन्हे अपने आप से हार माननी पडी। क्योंकि उन्हें पता था यह लड़ाई किसी दूसरी पार्टी से नही है बल्कि उनके बेटे से है. इसलिए उन्होंने अपनी हार मान ली, और अपने बेटे अखिलेश यादव को ही पार्टी का प्रमुख रहने दिया।

तो चलिए आइए जानते है आज के इस लेख में मुलायम सिंह यादव (नेताजी) जो की समाजवादी पार्टी के संस्थापक भी है उनके बारे में तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको Mulayam Singh Yadav के जीवन के बारे में अपको विस्तार से बताएंगे। Mulayam Singh Yadav Biography Hindi। विस्तार से बताएंगे। Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi।Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi

मुलायम सिंह यादव की जीवनी हिंदी में (Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi)

मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवम्बर 1939 को इटावा जिले के सैफई गाँव उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम सुघर सिंह यादव था जो की एक किसान थे. और उनकी माता का नाम मूर्ति देवी था। उतर प्रदेश की राजनीति हो या देश की राजनीति हो मुलायम सिंह का नाम प्रमुख नेताओं में लिया जाता है. मुलायम सिंह के चार भाई और 1बहन शिवपाल सिंह यादव, कमला देवी, अभयराम सिंह यादव, रतन सिंह, रामगोपाल सिंह यादव हैं। Mulayam Singh Yadav Biography In Hindi

मुलायम सिंह जी के पिता उन्हें एक पहलवान बनाना चाहते थे. उनसे पहलवानी करवाना चाहते थे. मुलायम सिंह की 2 शादी हुई थी जिसमे पहली शादी मालती देवी के साथ हुई था। उनकी मृत्यु मई 2003 में ही हो गई थी, जो की अखिलेश यादव की मां थी। इसके बाद मुलायम सिंह ने दूसरी शादी साधना गुप्ता से की थी। उनके बेटे का नाम प्रतीक यादव है. साधना गुप्ता का निधन हाल ही के कुछ महीनो में हुआ है।

मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी के बेटे जो की फिलहाल समाजवादी पार्टी के प्रमुख है उनका जन्म 1 जुलाई, 1973 को हुआ था. जब अखिलेश यादव बहुत छोटे थे तभी उनकी मां मालती देवी का देहांत हो गया था।

मुलायम सिंह की शिक्षा

मुलायम सिंह यादव पढ़ने में होशियार बताए जाते है उन्होंने जैन इन्टर कालेज, करहल (मैनपुरी) के कॉलेज से बी. टी.
(B.T) की डिग्री हासिल की थी और आगरा विश्वविद्यालय से उन्होंने एम.ए. (MA) की भी डिग्री हासिल की है. डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने कई साल तक इंटर कॉलेज में अध्यापन का कार्य भी किया है।

मुलायम सिंह राजनीति करियर

मुलायम सिंह यादव ने ही “समाजवादी पार्टी” की स्थापना 1992 में की थी. नेताजी करीबन 30 सालों से राजनीति में बने हुए थे. मुलायम सिंह अपने राजनीतिक गुरु नत्थूसिंह को मानते थे. एक बार मैनपुरी में एक कुश्ती आयोजित की गई थी. उस कुश्ती में मुलायम सिंह ने अपना जोर दिखाकर नत्थूसिंह जी को प्रभावित कर दिया था. नत्थूसिंह की परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से ही मुलायम सिंह ने अपनी राजनीति सफर का तुल पकड़ा था।

स्कूल के शिक्षक पद से इस्तीफा दे देने के बाद मुलायम सिंह यादव को 2 बार सहकारी बैंक का निदेशक नियुक्त किया गया था. पहले तो जसवंत नगर और बाद में इटावा के सहकारी बैंक के निदेशक के रूप में नियुक्त किए गए थे।

सन 1967 में मुलायम सिंह यादव पहली बार उत्तर प्रदेश, विधान सभा के लिए चुने गए थे। शुरू से ही मुलायम सिंह पिछड़े वर्गों और दलितों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे और उनके हक के लिए काम भी किए इसीलिए ही आज दलित और पिछड़ा वर्ग उनकी इज्जत करता है, और आज भी मुलायम सिंह जी गरीबों के मसीहा माने जाते है।

मुलायम सिंह पहली बार ‘सोशलिस्ट पार्टी’ से चुनाव लड़ कर विधायक बने और दूसरी बार ‘ प्रजा सोशलिस्ट’ पार्टी से विधायक बने थे. और सन 1977 में मुलायम सिंह यादव पहली बार मंत्री बने थे।

सन 1980 मे फिर से कांग्रेस की सरकार मुलायम सिंह यादव राज्य मंत्री बने. 1980 में ही चौधरी चरण सिंह के लोकदल पार्टी में अध्यक्ष चुने गए लेकिन विधान सभा चुनाव हार गए।

सन 1992 में बाबरी मस्जिद को तोड़ने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति दो हिस्सों में बट गई लेकिन इसका सीधा फायदा मुलायम सिंह को हुआ क्योंकि मुलायम सिंह ने मुलमान का साथ दिया और कारसेवकों पर गोली चलवाई इसी वजह से मुलायम सिंह को मुस्लिमों का समर्थन मिला।

अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ने के बाद मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया लेकिन यहां भी मुलायम सिंह ने मुस्लिम समुदाय का साथ देकर हिंदू कारसेवकों पर गोली चलाकर उनके बीच फिर से लोकप्रिय बन गए। और उन्हे मौलाना मुलायम भी कहा जाने लगा था।

सन 1989 में उत्तर प्रदेश सरकार बनने से पहले तब मुख्यमंत्री पद के दो उम्मीदवार चर्चे में थे –अजीत सिंह और मुलायम सिंह यादव. मुलायम सिंह उस समय अजीत सिंह से पुराने नेता थे. लेकिन अजित सिंह हाल फिलहाल में ही अमेरिका से वापस आए थे. लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह चाहते थे की अजित सिंह ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. जबकि मुलायम सिंह अपने आप को उतर प्रदेश का मुख्यमंत्री पहले से ही मान चुके थे. लेकिन मुलायम सिंह नही चाहते थे उनके सिवा कोई और उतर प्रदेश का मुख्यमंत्री बने।

जब मुख्यमंत्री का नाम तय करना मुस्कील हो गया था तब जाके पूर्व मुख्यमंत्री गुजरात के समाजवादी नेता चिमनभाई पटेल को लखनऊ भेजा गया. ताकि वो मुख्यमंत्री के नाम का सही चुनाव कर सके. उस समय पटेल जी उत्तर प्रदेश के जनता दल प्रभारी के पद पर मोजूद थे।

लेकिन पटेल जी पर विश्वनाथ प्रताप सिंह दबाव बनाए हुए थे की अजित सिंह का नाम फाइनल करे उनको उतर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना जाए. जैसे ही मुलायम सिंह यादव को इस बात का पता चला तो उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन देख चिमनभाई पटेल ने मुलायम सिंह के नाम को फाइनल कर और वो उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए।

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