ओम बन्ना की सच्ची कहानी ! Om Banna Real Biography Story In Hindi | Bullet Baba

ओम बन्ना की सच्ची कहानी ! Om Banna Real Biography Story In Hindi | Bullet Baba

हेलो दोस्तो आज के इस लेख में हम बात करने वाले है ओम बन्ना की सच्ची कहानी ! Om Banna Real Biography Story In Hindi
ओम बन्ना की सच्ची कहानी ! Om Banna Real Biography Story In Hindi
ओम बन्ना की सच्ची कहानी

ओम बन्ना एक पवित्र दर्शनीय स्थल है जो की राजस्थान के एनएच NH – 62 जोधपुर पाली जिले के चोटिला गांव में स्थित है। ये पाली शहर से 20 किमी तथा जोधपुर से 53 किमी दूर है। यहाँ लोग सफल यात्रा और मनोकामना मांगने दूर-दूर से आते हैं। अनेक बुद्धिजीवी इस स्थान के बारे में मानते हैं कि ओम बन्ना का स्थान एक आम भारतीय के अंधविश्वासों और अवैज्ञानिक मानस का एक प्रतीक है। क्यों कि ये एक बुलेट के रूप में पूजे जाते हैं तथा ये मंदिर पूरी दुनिया का अनोखा और एक मात्र बुलेट मंदिर है।

ओम बन्ना की जीवनी (Om Banna Real Biography In Hindi)

पूरा नाम            –   ओम सिंह राठौर

अन्य नाम          –   बुलेट बाबा, श्री ओम बन्ना

जन्म                –   सन 1965

जन्म स्थान        –   चोटिला गाँव, पाली, राजस्थान

बेटे का नाम।      –   महा परकर्मी

पिता का नाम     –   ठाकुर जोग सिंह

मृत्यु                 –   2 दिसंबर 1988

बाइक               –   रॉयल एनफील्ड 350 C बुलेट

ओम बन्ना की सच्ची कहानी (Om Banna Real Story)

यह बात सन 1988 की है जब ओम बन्ना जी अपनी बुलेट पर अपने ससुराल बगड़ी, साण्डेराव से अपने गाँव वापिस चोटिला आ रहे थे। तभी उनका एक्सीडेंट एक पेड़ से टकराने से हो गया ओम सिंह राठौड़ की उसी वक़्त मृत्यु हो गयी एक्सीडेंट के बाद उनकी बुलेट को रोहिट थाने ले जाया गया पर अगले दिन पुलिस कर्मियों को बुलेट थाने में नहीं मिली। पुलिस कर्मियों ने बुलेट को ढूंढ़ना शुरू किया और बुलेट खुद चलकर उस एक्सीडेंट वाली जगह पर पहुँच गयी। लेकिन अगले दिन फिर बुलेट को रोहिट थाने लेकर गए।और फिर से ऐसा ही हुआ। ऐसा तीन बार हुआ चौथी बार पुलिस ने थाने में एक चैन से बुलेट को बाँध दिया गया। 

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लेकिन सबके होश उड़ गए बुलेट सबके सामने चालू होकर दुबारा उसी दुर्घटना स्थल पर पहुंच गयी अतः ग्रामीणो और पुलिस वालो ने चमत्कार मान कर ओम बन्ना के पिताजी को बताया गया जिसे सुनकर उनके पिताजी ने ओम बन्ना की बुलेट को उस दुर्घटना स्थल पर रखवाकर चबूतरा बनवा दिया और उस दिन से आज तक वहाँ कोई भी दुर्घटना वह मौत नहीं हुई। लेकिन ये स्थान पहले राजस्थान के बड़े दुर्घटना स्थानों मे से एक माना जाता था। लोगो के मुताबिक ओम बन्ना की पवित्र आत्मा आज भी वह लोगो को अपनी मौजूदगी का एहसास कराती है आज भी रोहट थाने के नए ठाणेदार जोइनिंग से पहले वहाँ मत्था टेककर आते हैं।

ओम बन्ना मंदिर (Om Banna Temple)

ओम बन्ना की सच्ची कहानी ! Om Banna Real Biography Story In Hindiओम बन्ना मंदिर

 

राजस्थान के पाली में स्थित ओम बन्ना मंदिर में एक मोटरसाइकिल की पूजा भगवान की तरह की जाती है। यहां पर काले रंग की एक रॉयल एनफील्ड बुलेट जो फूलों की माला से लदी एक शीशे के बक्से में रखी गई है यही ओम बन्ना का चबूतरा भी है , यहां उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। और ग्रामीण यहाँ फल, फूल नारियल, दारू आदि चढ़ावा चढ़ाते है जिसके पीछे यहां के लोगों की आस्था के साथ कई तरह की मान्यताएं भी जुड़ी हुई है।

राजस्थान के पाली जिले के चोटिला गांव में ओम बन्ना का यह मंदिर स्थित है। इस मंदिर का नाम ‘ओम बन्ना धाम’ है। लोग इसे ‘बुलेट बाबा मंदिर’ के नाम से भी जानते हैं। यहां पर ओम बन्ना की 350 CC रॉयल एनफ़ील्ड बुलेट जिसका नंबर 7773 है। यहा पर इस बुलेट की पूजा पिछले 30 सालों से लोग कर रहे हैं, इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प और रहस्यमई बताई जाती है।

पाली जिला जोधपुर राष्ट्रीय राज मार्ग पर ये जगह  स्थित है और जहाँ पर उनका एक्सीडेंट हुआ था। उस जगह पर ओम बन्ना जी का चबूतरा बनाया गया है। और उस चबूतरे में ओम बन्ना की वह बुलेट आज भी मौजूद है। और यहाँ दिन रात जोत जलती रहती है और यहाँ आने वाले सभी श्रद्धालु नारियल, दारू, फूल, आधी चढ़ावा चढ़ाते हैं और यहाँ दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं।

ओम बन्ना की मृत्यु होने के पश्चात क्या चमत्कार हुआ।

ओम बन्ना दुर्घटना में मृत्यु होने के पश्चात मौके पर पहुंची रोहट थाने की पुलिस ने उसकी बुलेट को थाने ले गई। लेकिन अगली सुबह की घटना ने सबको चौंका दिया। क्योंकि ओम बन्ना की बुलेट थाने में ना मिलकर उस एक्सीडेंट वाली जगह पर पाई गई।

यह सब देखकर पुलिस हैरान थी।सूचना मिलने पर पुलिस गाड़ी को फिर से थाने ले आई लेकिन अगली सुबह गाड़ी थाने से गायब होकर, उसी दुर्घटना स्थल पर पहुंच गई। 

बार-बार बाइक का घटनास्थल पर पहुंच जाने पर  पुलिस को शक हुआ तो गाड़ी को फिर से थाने में लाकर एक चैन से बांध दिया गया। और रात भर उसकव निगरानी में रखा गया, और तब पुलिसकर्मियों ने देखा कि जंजीरों में बंधी हुई बुलेट अपने आप स्टार्ट हुई और सभी जंजीरे तोड़कर उसी दुर्घटना स्थान पर पहुच गयी। 

इसके बाद पुलिस कर्मियों ने सोचा कि गाड़ी  को ओम सिंह राठौड़ के घर पर खड़ा कर दिया जाए। लेकिन घर से भी बाइक उसी घटना स्थल पर पहुंच गई। बार-बार बाइक का उसी घटनास्थल पर खुद पहुच जाना। ये सब देखकर, ओम बन्ना के पिताजी ने इसे ओम बन्ना की इच्छा माना और बाइक को दुर्घटना स्थल पर चबूतरा बनवा कर खड़ा कर दिया। 

तो ये थी दोस्तो Om Banna जी की सच्ची कहानी, उम्मीद है आपको बहुत दिलचस्प लगी होगी, आप इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ Share कर सकते है और यहाँ पर Comment भी कर सकते है।

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