मार्शल लॉ क्या होता है | Martial Law Meaning | Rules | Martial Law In Hindi

मार्शल लॉ क्या होता है | Martial Law Definition, Meaning, who can declare martial law Full Detaill in Hindi

मार्शल लॉ क्या होता है, नेशनल इमरजेंसी से कैसे अलग होता है, इसकी घोषणा कौन करता है, किन किन देशों में लगाया जा चुका है, लागू कब हुआ, क्या भारत में कभी लागू हुआ है, लगा हु तो कब लगा, क्यों लगा, इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे आज के इस लेख में (What Is Martial Law Meaning, National Emergency, Martial Law Definition, Who can Declare Martial Law full Details in Hindi, India Martial Law।

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मार्शल लॉ क्या होता है | What Is Martial Law

जब किसी भी देश की परिस्थितिय खराब हो जाती है तब किसी भी देश की व्यवस्था को उन्ही की सेना के हवाले कर दिया जाता है, उस समय जो नियम प्रभावी होते है उसी को सैनिक कानून (Martial Law) कहा जाता है। जब कभी युद्ध होता हैं और युद्ध के समय जो क्षेत्र (देश) अपनी जीत दर्ज कर लेता हैं, तो वहा उस क्षेत्र में मार्शल लॉ (Martial Law) को लगा दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर बात करे तो जब द्वितीय विश्व युद्ध हुआ था तो बाद में जापान और जर्मनी में मार्शल लॉ को लागू कर दिया गया था। अगर किसी देश में कोई बड़ी प्राकृतिक विपदा आती है तो भी मार्शल लॉ लगा दिया जाता है। ये जरूरी नहीं होता की मार्शल लॉ को पूरे देश में ही लागू करना पड़ेगा, इसे देश के किसी भी भाग में लगा सकते है।

मार्शल ला कानून के अंदर कर्फ्यू आदि कानून आते है। मार्शल लॉ के अंतर्गत आने वाले कुछ भाग में न्याय करने के लिए सेना का एक न्यायाधिकरण नियुक्त किया जाता है जिसे कोर्ट मार्शल कहा जाता है. इसमें बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका जैसे अधिकार आते है।

मार्शल लॉ को कब और क्यों लगाया जाता है। When and why is martial law imposed?

मार्शल लॉ को उस समय लगाया जाता है तब किसी देश में युद्ध की स्थिति, देश में अशांति फैल जाती है, या देश में कोई बड़ी आपदा या आपातकालीन जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं उस समय वहा की जो सरकार होती है फैसला लेने में असमर्थ हो जाती है की क्या करना चाहिए, इस समस्या से कैसे निपटा जाए. तब जाके वहा के सभी निर्णय सेना के द्वारा ही लिए जाते हैं. और उस जगह पर सेना के द्वारा कब्जा कर लिया जाता है. अगर मे इसे आसान भाषा में आपको समझाऊं तो किसी देश में या देश के किसी भी राज्य में जब कोई संकट पैदा हो जाता हैं, तो मिलिट्री के नियमो के अनुसार कुछ समय के लिए वहा पर मार्शल लॉ को लगाया जाता है और उन्ही के नियमों का पालन भी करना पड़ता है. मार्शल लॉ को जरूरी नहीं होता की इसे पूरे देश में ही एक साथ लगाना पड़ता है. इसे देश के किसी भी भाग, क्षेत्र में भी लगाया जा सकता है. इस लॉ को लगाने का मतलब ये बिल्कुल नही होता की अब युद्ध की शुरुआत होगी, इस लॉ में कुछ समय के लिए वहा की सरकार के नियमो का पालन ना होकर मिलिट्री के नियमों का पालन होता है. क्योंकि कई बार ऐसा हो जाता है की कोई प्राकृतिक आपदा आ जाती है, जैसे देश में या किसी राज्य में बाढ़, या कोई भयानक तूफान आ जाता है या फिर बीच में ही एक सरकार से दूसरी सरकार बन जाती है (मतलब की तख्ता पलट होना) तब भी मार्शल लॉ को लगाना पड़ जाता है।

मार्शल लॉ और नेशनल इमरजेंसी में क्या अंतर है (Martial Law and National Emergency Difference)

मार्शल लॉ और नेशनल इमरजेंसी दोनों कानून के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है, तो आइए जानते है इन दोनो के बीच के अंतर को –

  • जब मार्शल लॉ लग जाता है तो सिर्फ लोगों के मौलिक अधिकारों पर ही इफेक्ट पड़ता है, लेकिन जब राष्ट्रीय इमरजेंसी (आपातकाल) लगता है तो मौलिक अधिकार, बिजली, संघीय योजना (Fedrel Scheme) आदि पर प्रभाव पड़ता है।
  • भारत के संविधान में मार्शल लॉ को लगाने के बारे में कोई भी सूचना (Information) नही लिखी गई है. लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) को कब लगाया जाता है इसके बारे में भारतीय संविधान में पूरे विस्तार से बताया गया है।
  • मार्शल लॉ सरकार के साथ – साथ, साधारण अदालतों को भी निलंबित कर देता है, लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल में साधारण अदालतें भी अपना काम करती है।
  • मार्शल लॉ को देश, राज्य, क्षेत्र में लागू करने का काम मिलिट्री के द्वारा होता है, लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति के द्वारा लगाया जाता हैं और इसमें मिलिट्री का काम ज्यादा नही. आपातकाल को जब लगाया जाता है जब मंत्रिमंडल द्वारा लिखित प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास पहुंचता है।
  • किसी भी देश में मार्शल लॉ को उस समय लगाया जाएगा, जब उस देश की कानून व्यवस्था या न्याय व्यवस्था खराब हो जाती है, लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल दूसरे देश के द्वारा उस देश पर आक्रमण, या फिर युद्ध की स्थिति में इसको लगाया जाता है. लेकिन किसी दूसरे देशों में इस स्थिति में मार्शल लॉ को भी लगाया जा सकता है।

किन – किन देशों में मार्शल लॉ को लगाया गया और कब लगाया | In which countries martial law was imposed and when

कनाडा – इस देश में अमेरिकी महाद्वीप कांग्रेस की सेना ने 1775 – 1776 में कनाडा पर आक्रमण किया था, उस दौरान कनाडा के एक क्यूबैक क्षेत्र में मार्शल लॉ लागू किया गया था. फिर 1837 – 1838 में देश में विद्रोह के समय लोअर क्षेत्र में मार्शल लॉ को लागू किया गया था।

ऑस्ट्रेलिया – ब्लैक वॉर, सन 1820 – 1832 तक तस्मानिया क्षेत्र में ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी और ब्रिटिश उपनिवेशवादियों लोगो के मध्य में बड़ी हिंसक हुई थी. इन दोनो समुदाय के मध्य यह हिंसक काफी लंबी चली, उस दशक में लेफ्टिनेंट – गवर्नर जॉर्ज आर्थर थे उन्होंने मार्शल लॉ को नवंबर 1828 में लगाया था. और यह 3 साल से भी ज्यादा तक लागू रहा था, ऑस्ट्रेलिया के इतिहास के अनुसार यह मार्शल लॉ सबसे ज्यादा समय तक लागू रहा है।

अमेरिका –  यूनाइटेड स्टेट्स में यह अलग – अलग समय में कई बार लगाया जा चुका है जैसे जापानी हमले के बाद, न्यू ओरलेंस की लड़ाई के समय और सन् 1871 में ग्रेट शिकागो फायर (Great Chicago Fire) के दौरान वं सन् 1906 में सैन फ्रांसिस्को भूकम्प आने के बाद और आखिरी बार सन 1934 में घरेलू आंदोलन और विरोध प्रदर्शन में मार्शल लॉ को लगाया गया था।

आयरलैंड – आजादी के दौरान आयरिश युद्ध में ब्रिटिश अधिकारियों ने आयरलैंड के ज्यादातर भागो में मार्शल लॉ लागू किया गया था, लेकिन बाद में ब्रिटिश सरकार ने इसे पूरे देश में लागू कर दिया था और सन् 1916 में ईस्टर राइजिंग के समय वहा के लेफ्टिनेंट लार्ड विम्बोर्न (Lieutenant Lord Wimborne) द्वारा इसे आयरलैंड के डबलिन क्षेत्र में लगाया गया था।

साउथ कोरिया – सन् 1946 अक्टूबर में कोरिया में संयुक्त राज्य आर्मी सैन्य सरकार के द्वारा डेगू दंगे को देखकर मार्शल लॉ को लगाया गया था . 2 साल बाद इसे 17 नवंबर 1948 को उस समय के राष्ट्रपति सिंग्मन रिहे रेजिम ने जेजू नाम के विद्रोह को खत्म करने के मार्शल लॉ को लगाया गया था.

ताइवान – जब द्वितीय विश्व युद्ध में चीन ने जीत दर्ज कर ली थी तो उसके बाद कई देश चीन के कब्जे में हो गए थे, इनमे से एक ताइवान भी था जिसमे सन 1949 में इसे मार्शल लॉ लगाए गया था।

चाइना – चाइना में तियानानमेन स्क्वायर विरोध के समय राज्य परिषद ने 20 मई 1989 को मार्शल लॉ लगाया गया था. इस विद्रोह को एक नाम और दिया गया था ’89 लोकतंत्र आंदोलन’ लेकिन इस आंदोलन को मार्शल लॉ लगने के बाद से ही जबरस्ती बंद करवा दिया गया था।

मिस्र – यहां पर सन 1967 से ही आपातकाल की संभावना बन गई थी लेकिन उस दौरान इसे नही लगाया गया था, लेकिन 1981 में राष्ट्रपति अनवर अल सदात की हत्या करने के बाद आपातकाल को तुरंत लगाया गया. उसी समय से ही यहां पर मार्शल लॉ लगा हुआ है. इसे हर 3 साल के अंदर और बढ़ा दिया जाता है।

इंडोनेशिया – 18 मई सन 2003 को एसेनीज़ अलगाववादियों को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति के कहने पर एसे (Aceh) में Military Activity के समय वहा के सेना प्रमुख (Military General) ने 6 महीने के लिए मार्शल लॉ लगाया था।

इजराइल – सन् 1949 – 1966 में इजरायल के कुछ क्षेत्रों में, गैलिली, ट्रायंगल और नेगेवमें में बड़ी आबादी वाली सैन्य प्रशासनिक सरकार प्रभाव में थी. तब उस दौरान इन तीनो क्षेत्रों में मार्शल लॉ को लगाया गया था।

मॉरिशस – सन् 1968 में यहाँ पर आपातकाल लगने के कगार पर आ गया था, तब जाकर यहां मार्शल लॉ लगाया गया था।

फिलीपींस – यहां पर 21 सितंबर 1944 को द्वीतीय विश्व युद्ध के समय यहां के राष्ट्रपति के कहने पर लगाया गया था. एक बार फिर 1972 – 1981 को भी यह6 पर मार्शल लॉ लगाया गया था।

सीरिया – सन् 1963 में कूप डी’ एटैट के बाद से ही, वर्तमान में भी मार्शल लॉ को जारी रखा है।

तुर्की –  यहां सन् 1923 में तुर्की प्रजातंत्र राज्य हो जाने के बाद से ही आर्मी ने तीन कूप डी’एटैट की व्यवस्था की थी उसी दौरान मार्शल लॉ को लगाने की घोषणा की थी. इसके बाद फिर सन 1978 में मार्शल लॉ को लगया गया, परंतु उसे 2002 तक कुछ जगह को आपातकालीन स्थिति में चेंज कर दिया गया था।

यूक्रेन – अगर हम यूक्रेन की बात करे तो, वर्तमान में यहाँ के पड़ोसी देश ट्रान्सनिस्ट्रिया और रूस में मार्शल लॉ लगाने के बारे में खबरे आ रही है।

मार्शल लॉ लगाने से क्या प्रभाव पड़ता है | What is the effect of imposing martial law

किसी भी देश में मार्शल ला लगने पर उस देश के नागरिकों को बढ़ी समस्या से जूझना पड़ता है, और मिलिट्री के द्वारा बनाए गए नियमो का पालन करना पड़ता है. आपको पता ही है की मिलिट्री के नियम बढ़े सख्त होते है. और इसी वजह से ही वहा के नागरिक किसी का भी विरोध नही कर सकते है।

सरकार के द्वारा शुरू किए गए आम नागरिकों की भलाई हेतु काम भी प्रभावित हो जाते है, जिसे वहा के आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. मार्शल लॉ लगने के बाद आम नागरिकों के अधिकार भी छीन जाते हैं. अब तक जिस – जिस देशों में मार्शल लॉ लगाया गया है, उन – उन देशों मैं लोकतंत्र पर बहोत ज्यादा फर्क पड़ा है. लॉ से उन्हे बहुत समस्याओ का सामना करना पड़ा है सन् 2021 में म्यांनमार में मार्शल लॉ को घोषित किया गया था, जिससे वहां के लोगो को बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ा था. वहां के लोगो को सेना ने मारा था. वहां पर सेना और आम नागरिकों के बीच हर दिन संघर्ष चलता था और इस संघर्ष में हजारों लोगो की भी मौत हो गई थी और वहा के नागरिक अपने देश को छोड़कर दूसरे देश जाने लगे थे।

भारत में मार्शल लॉ कब लागू हुआ था?

भारत में मार्शल लॉ अंग्रेजी शासन के दौरान 1919 में लागू हुआ था।

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