ए पी जे अब्दुल कलाम जीवन परिचय ! APJ Abdul Kalam Biography in Hindi 2023

ए पी जे अब्दुल कलाम जीवन परिचय ! APJ Abdul Kalam Biography in Hindi 2023

APJ Abdul Kalam जी एक इकलौते ऐसे वैज्ञानिक है जो देश के राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य संभाल चुके है और उन्हें राष्ट्रपति से अधिक विज्ञान क्षेत्र में किये गये उनके योगदान की वजह से जाना जाता है और कलाम जी को “मिसाइल मेन” के रूप में भी जाना जाता है तो आइए जानते है कलाम जी की जिंदगी से जुड़ी बातों को।

ए पी जे अब्दुल कलाम जीवन परिचय ! APJ Abdul Kalam Biography in Hindi
डॉ ए. पी. जे अब्दुल कलाम

 

ऐपीजे अब्दुल कलाम जीवन परिचय (APJ Abdul Kalam Hindi Biography)

APJ Abdul kalam के माता-पिता ज्यादा न पढ़े लिखे होने के कारण इनका जीवन सामान्य बिता। 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव जो तमिलनाडु में स्थित है। मुस्लिम परिवार में जन्मे APJ Abdul Kalam के पिता का नाम जैनुलाब्दीन था। कलाम जी के पिता ज्यादा पढ़े लिखे न होने के कारण घर की हालत सही नही थी। और कलाम 5 भाई बहन थे।

कलाम जी को अपने पिता की मेहनत और लगन दखकर आने वाले समय पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा। कलाम जी शुरू से ही बहुत मेहनती थे और इसकी वजह थी उनके पिता। उनके पिता की आय बहुत अधिक नहीं थी और अगर थी भी तो भी घर में बहुत से भाई बहन थे जिसके कारण एक अच्छे स्कूल में शिक्षा ले पाना उनके लिए सम्भव नहीं था | कलाम के पिता नावों के मालिक थे और वो मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे और साथ ही वो एक लोकल मस्स्जिद के इमाम भी थे। APJ Abdul Kalam अपने चार भाईयों में सबसे छोटे थे। कलाम की माता आशिमा गृहिणी थी।

 शिक्षा और वैज्ञानिक जीवन (Education And Scientific life)

APJ Abdul Kalam की शुरूआती शिक्षा उनके रामेश्वरम में ही स्थिति एक सरकारी स्कूल में हुई | हालाँकि उनकी शुरुआत की शिक्षा के जीवन में भी बहुत सी कठिनाईयां थी और अपनी शिक्षा को जारी रखने के लिए उन्होंने अखबार बांटने का भी काम किया है | कलाम के स्कूल के दिनों की बात करें तो उनके मार्क्स एवरेज आते थे लेकिन फिर भी वो बहुत मेहनत के साथ अपनी पढाई करते थे |

वो अपनी पढ़ाई के लिए घंटो मेहनत किया करते थे और इसलिए कहा जाता है कि उनमे सीखने की बहुत ललक थी | हम यह भी कह सकते है कि हो सकता है कलाम पढाई के साथ साथ अपने खर्चे चलाने के लिए काम करने की वजह से उनकी पढ़ाई में कम नंबर आते थे। मग़र जैसा भी हो कलाम हर काम को सीखने की इच्छा उनके विचारों से मिलती है। 

कलाम जी ने तीन महान शिक्षकों से नेतृत्व सीखा – प्रोफेशर सतीश धवन, डॉ विक्रम साराभाई, और डॉ ब्रह्म प्रकाश जी। मेरे लिए यह सीखने और ज्ञान के अधिग्रहण के समय था।

1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े के बाद ये उन् के द्वारा कहा गया था। स्कूल की अपनी पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1958 में Madras Institute of Technology से अपनी अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी स्नातक की पढाई पूरी की | इसके बाद उन्होंने  भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया और हावरक्राफ्ट परियोजना में काम करने में अपना विशेष योगदान दिया |

इसके बाद जैसा कि हमने ऊपर बताया वो 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े और वंहा पर उन्होंने कई उपग्रह प्रक्षेपण योजनाओं में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया | उनके योगदान को देखते हुए नहे परियोजना निदेशक बना दिया गया और परियोजना निदेशक के रूप में उन्हें भारत का पहला स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया उपग्रह एस.एल.वी. तृतीय बनाने का श्रेय मिला ।

इसरो यानि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को अंतराष्ट्रीय क्लब में शामिल करने वाली योजनाओं को शिखर पर ले जाने का श्रेय इन्हें ही जाता है | APJ Abdul Kalam ने गाइडेड मिसाइल्स को डिजाइन किया था और इसलिए इन्हें मिसाईल मैन भी कहा जाता है | इन्होने ही अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाईल को स्वदेशी तकनीक से बनाया था | कलाम जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक तत्कालीन रक्षा मंत्री के विज्ञानं सलाहकार और सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव भी रहे है |  उन्ही की देख रेख में भारत द्वारा दूसरा परमाणु परीक्षण 1998 में पोखरण में सफल होने के बाद उसे परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल कर लिया गया ।

राष्ट्रपति पद के तौर पर जीवन (life as president)

APJ Abdul Kalam 18 जुलाई 2002 को 90 प्रतिशत बहुमत के साथ देश के राष्ट्रपति के तौर पर चुना गया और 25 जुलाई 2002 को कलाम जी ने शपथ ली। हालाँकि कलाम जी राजनीतिक क्षेत्र से संबंध नही रखते थे। राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी सोच देश के राष्ट्रवादी और नीतियों पर काम करने की बन गयी थी।

(2015) 27 जुलाई की शाम कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में भाषण देते वक्त उनको दिल का दौरा पड़ा। जिसे विज्ञान की भाषा में कार्डियक अरेस्ट कहते ह दौरा पड़ने की वजह से बेहोश होकर गिर पड़े, तब जाकर उन्हे “बेथानी अस्पताल” के आईसीयू में शाम के 6.30 बजे गंभीर हालत में लाया गया।

लेकिन थोड़ी देर में ही डॉक्टर्स ने कलाम जी को मृत घोषित कर दिया।डॉक्टर्स ने बताया यह लाने से पहले ही इनका ब्लड प्रेशर और नब्ज साथ छोड़ चुके थे। यह सब इतना अचानक हुआ था। और ये ब्रेकिंग न्यूज़ बन गयी थी, क्योंकि शिलोंग जाने से एक दिन पहले कलाम जी ने ट्वीट के जरिये सबको बताया था।

कलाम जी को 30 जुलाई 2015 को राजकीय सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में मुस्लिम रीति रिवाज के साथ दफना दिया गया। बड़े बड़े नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी सहित 3,60,000 लोग कलाम जी के लिए वह पहुच गए थे।

एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में रोचक तथ्य (Interesting Facts about APJ Abdul Kalam 

APJ Abdul Kalam के जीवनी में बीती कुछ खास बातें आइए जानते है –

● कलाम ने पढ़ाई के साथ-साथ अखबार बाँटने का भी काम किया है।

● कलाम जी ने संसद भवन के अशोक कक्ष में 5 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति पद के रूप में शपथ ली।

● कलाम जी की “विंग्स ऑफ़ फायर” युवाओं को प्रेरित करने वाली किताब है, जिसमें कलाम की जीवनी विस्तार से प्रस्तुत की गई है।

● कलाम जी के द्वारा लिखी गाइडिंग सोल्स – डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज ऑफ़ लाइफ (Dialogues Off The Purpose Off Life) किताब में इनके आत्मिक विचारों से परिपूर्ण है।

● दक्षिण कोरिया (South Korea) में कलाम जी की पुस्तकों की बहुत ज्यादा मांग होती है और वह के लोग इनसे बहुत प्रेरित होते है, कलाम जी को बहुत सम्मान दिया जाता है।

● कमाल जी ने तमिल भाषा में भी बहुत सी कवितायेँ लिखी है।

● हालाँकि APJ Abdul Kalam राजनीति के बैकग्राउंड से नहीं थे लेकिन फिर भी इंडिया 2020 में इनकी राजनीतिक दृष्टिकोण को बेहतर समझा जा सकता है।

● कलाम जी का एक लक्ष्य ये भी था कि भारत को परमाणु और विज्ञान के क्षेत्र में महाशक्ति बनना देखना चाहते थे |

● कलाम द्वारा कर्नाटक भक्ति संगीत को बेहद पसंद किया जाता था।

● कलाम जी को 2003 और 2006 में “एमटीवी यूथ आइकन ऑफ़ द इयर” (Mtv Youth Icon Of The Year) के तौर पर नामांकित किया गया।

● इनके मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा 7 दिन का राजकीय शोक मनाया गया।

● दलाई लामा ने कलाम जी की मृत्यु को दुनिया की अपूर्णीय क्षति” बताकर उनके निधन पर शोक प्रकट किया।

● कलाम जी एक अच्छे वैज्ञानिक , शिक्षक और राजनेता थे।

● कलाम जी हमेशा अनुशासन में रहना पसंद करते थे। और उनकी मौत का पता चलने पर देश-विदेश के राजनेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

● कलाम जी गीता और कुरान दोनों में ध्यान रखते थे। और हिंदू संस्कृति भी उन्हें बहुत प्रिय लगती थी।

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