IP Address क्या है कितने प्रकार के होते हैं और कैसे काम करता है। 2023

IP Address क्या है कितने प्रकार के होते हैं और कैसे काम करता है।

दोस्तो आज के इस लेख में हम बात करने वाले है IP Address क्या है कितने प्रकार के होते हैं हम लोग एक दूसरे से बात करने के लिए अपनी बातों को साझा करने के लिए और दूसरों की बातों को समझने के लिए एक दूसरे के साथ बातचीत करते हैं लेकिन बिना किसी संपर्क के किसी से बातें शेयर नहीं की जा सकती। IP Address क्या है|

इंसानों की तरह ही कंप्यूटर्स को भी एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट करने के लिए एक जरिए का होना बहुत जरूरी है जिसे कंप्यूटर के बीच डाटा को आसानी से शेयर किया जा सके। इंसान अपनी भाषा का प्रयोग करके कम्युनिकेट करते हैं और आज के समय में भी सभी कंप्यूटर से एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट करने के लिए ip का इस्तेमाल करते हैं। आपने कभी ना कभी आईपी का नाम जरूर सुना होगा। अगर नहीं सुना तो आज हम आपको इस लेख में आईपी के बारे में पूरी इंफॉर्मेशन देने वाले हैं IP Address क्या है कितने प्रकार के होते हैं और कैसे काम करता है। और इसका पता कैसे करे।IP Address क्या है?

IP Address क्या होता है? (What is My IP Address)

आईपी एड्रेस का पूरा नाम Internet Protocol है। आईपी नियमों का एक समूह होता है जो कंप्यूटर्स को एक दूसरे के साथ नेटवर्क जैसे इंटरनेट पर बातचीत करने के लिए अनुमति देते हैं। वैसे तो कंप्यूटर एक ऐसा यंत्र है जो सिर्फ अकेले ही बहुत से काम करने के लिए तैयार है। लेकिन इसकी सचाई तब पता चलती है जब एक कंप्यूटर दूसरे कंप्यूटर के साथ बातचीत कर पाते हैं।

IP Address क्या है कितने प्रकार के होते हैं और कैसे काम करता है।

कंप्यूटर उसको नेटवर्क के जरिए चाहे कोई भी काम हम करवा सकते है जैसे ईमेल भेजना, नेटफ्लिक्स देखना, सोशल नेटवर्किंग साइट से चैटिंग करना। इन सभी कार्यों में अलग-अलग कंप्यूटर एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट करते हैं। फिर चाहे वह कंप्यूटर किसी भी देश में हो, कंप्यूटर किसी भी कंपनी का हो, और उस पर चाहे कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया हो।

कंप्यूटर्स कम्युनिकेट कर पाते हैं प्रोटोकॉल की मदद से प्रोटोकॉल नियमों एवं प्रक्रियाओं किस समूह को कहते हैं जिन्हें सफलतापूर्वक कम्युनिकेशन करने के लिए प्रत्येक डिवाइस को इस नियम का पालन करना पड़ता है। जिसे एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से बात करने के लिए एक नियम का पालन करता है जिसने उसे सामने वाले के साथ कैसे पेश आना है और कैसे बातें करनी है। यह पता होता है।

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ठीक उसी तरह एक कंप्यूटर को भी दूसरे कंप्यूटर के साथ कैसे कम्युनिकेट करना है, इसके लिए भी नियम बनाए गए हैं। इन्ही नियमों के समूह को I P कहते हैं।

IP Address का क्यों इस्तेमाल किया जाता है।

IP एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है जिनके जरिए इंटरनेट नेटवर्क या अन्य इंटरनेट डिवाइस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। यह प्रोटोकॉल एक गाइडलाइन जारी करता है जिसका पालन करते हुए कंपनियां अपने कंप्यूटर डिवाइसेज और हार्डवेयर का निर्माण करते हैं।

आईपी का इंप्लीमेंटेशन लगभग सभी प्रकार के हार्डवेयर। और ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए समान रूप से काम करता है इसलिए सभी प्रकार के नेटवर्क ip के प्रयोग के द्वारा आपस में कनेक्ट हो पाते हैं। इनका प्रयोग डाटा को सुरक्षित ढंग से भेजने के लिए किया जाता है। इन प्रोटोकॉल के जरिए ही कोई भी सूचना इंटरनेट में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचती है।

जब हम अपने कंप्यूटर से कोई डाटा अपलोड या फ्री डाउनलोड कर रहे होते हैं तो इस प्रक्रिया को आईपी के माध्यम से कंट्रोल किया जाता है क्योंकि जब कोई फाइल्स इंटरनेट से डाउनलोड या अपलोड होती है तो यह प्रक्रिया एक पैकेट के रूप में होती है। इन पैकेट में डाटा का समूह होता है और IP का कार्य केवल इन पॉकेट्स को हमारी कंप्यूटर में डाउनलोड और अपलोड होते समय उसे कंट्रोल करना होता है।

IP Address Full Form क्या है।

IP Address का फुल फॉर्म Internet Protocol होता है।

IP Address कैसे काम करता है?

इंटरनेट के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला कम्युनिकेशन प्रोटोकोल पीपीटी आईपी है। IP दो कंप्यूटर के बीच इंफॉर्मेशन को भेजता है और कमीनी किशन की सुविधा उपलब्ध करवाता है। और यह प्रोटोकॉल इंटरनेट में शिथित डाटा को सुरक्षित रखता है और उस डाटा को उसके निश्चित स्थान तक पहुंचाते हैं।

यह प्रोटोकॉल दो भागों में विभाजित है।

TCP (टीसीपी)

टीसीपी की भूमिका डाटा को छोटे-छोटे भागों में बांटने की होती है जो इंटरनेट पर डाटा ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया जाता है ये किसी फाइल्स या मैसेज को एक जगह से किसी दूसरे जगह पर भेजने में मदद करता है।

IP (आईपी)

आईपी टीसीपी के द्वारा विभाजित किए गए पैकेट्स का एड्रेस मुहैया कराता है ताकि प्रत्येक पैकेट सही रास्ते पर भेजा जा सके। इसका मतलब है कि टीसीपी एक पूरी डाटा को छोटे-छोटे डाटा पैकेट के रूप में बाट देता है और इसे इंटरनेट में भेज देता है। अब आईपीएस डाटा को उसकी डेस्टिनेशन प्वाइंट तक पहुंचाता है जिससे इंटरनेट और नेटवर्क के बीच में संपर्क स्थापित हो जाता है।

इन दोनों प्रोटोकॉल में बिना इंटरनेट के कम्युनिकेशन संभव नहीं है। यह प्रोटोकॉल इंटरनेट से जुड़े हुए प्रत्येक कंप्यूटर में इस्तेमाल किया जाता है। चाहे वो लैपटॉप हो, पर्सनल कंप्यूटर हो या सुपर कंप्यूटर, ये सभी में समान रूप से लागू होता है और इंटरनेट से जुड़े हुए प्रत्येक नेटवर्क में इस्तेमाल किया जाता है किसी नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल IP होता है जो अपने आप में बहुत सारे प्रोटोकॉल से मिलकर बना होता है। इसीलिए इसे आईपी प्रोटोकोल Suite आईपी रेफरेंस मॉडल कहा जाता है।

इस मॉडल में 4 लेयर होते हैं जो प्रोटोकॉल के काम को पूरा करने में मदद करते हैं जब Ip सेंटर से डेटा को लेकर उन्हें बाट कर पैकेट बनता है और इन पैकेट्स को रिसीवर पास भेजता है। सभी लेयर्स में कम्युनिकेशन के काम को डिवाइड किया गया है और इन सभी ले उसका काम भी एक-दूसरे से बिलकुल अलग होता है। तो आइए जानते है इन लेयर्स के नाम जो की इस प्रकार है –

1. Application Layer

2. Transport Layer

3. Internet Layer

4. Network Access Layer

तो आइए सबसे पहले जानते है-

एप्लीकेशन लेयर – What is Application Layer

यह लेयर आईपी मॉडल की सबसे ऊपर वाली लेयर है। यह लेयर कंप्यूटर एप्लीकेशंस को नेटवर्क सर्विसेज उपलब्ध करवाने में मदद करता है। यह लेयर यूजर को कम्युनिकेशन के लिए इंटरफ़ेस उपलब्ध करवाता है। इसमें यूजर अपने विभिन्न एप्लीकेशन जैसे कि ब्राउजर FTP, ई-मेल आदि के साथ कार्य करता है। इसलिए घर का काम ट्रांसपोर्ट लेयर को डाटा भेजना और उससे डाटा को रिसीव करना होता है। यह लेयर बहुत सारे प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है जैसे HTTP, DNS, FTP, TFTP, SMTP, SNMP, TELNET आदि। एप्लीकेशन लेयर ट्रांसपोर्ट लेयर को डेटा भेजती है तथा उससे डाटा रिसीव करती है।

ट्रांसपोर्ट लेयर – What is Transport Layer

यह लेयर डाटा के ट्रांसमिशन के लिए जिम्मेदार होती है। इसका कार्य नेटवर्क की विभिन्न होस्ट कंप्यूटर के बीच कम्युनिकेशन को निर्धारित करना होता है।
ट्रांसपोर्ट लेयर में Error Checking Of Flow Control भी होता है ताकि दो कम्युनिकेशन के बीच में कोई भी डेटा । आपने सही रिसीवर और सेंटर तक पहुंच सके। इस लेयर में दो मुख्य प्रोटोकॉल काम करते हैं।

वो है TCP यानी ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल और UDP यानी कि यूजर डाटा ग्राम प्रोटोकॉल, इस लेयर में और टीसीपी और यूडीपी प्रोटोकोल में भेजी जाने वाली बड़ी सूचना को एप्लीकेशन लेयर से प्राप्त कर के छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करके इंटरनेट लेयर में भेजते हैं। इसमें टीसीपी अधिक रिलाएबल और कनेक्शन ओरिएंटेड प्रोटोकॉल होता है क्योंकि टीसीपी डाटा ट्रांसफर करने से पहले कनेक्शन सेटअप करता है।

और रिलाएबल कनेक्शन होने के बाद ही डाटा ट्रांसफर करता है। टीसीपी में डाटा पैकेट के पहुंचने की गारंटी होती है। इसीलिए टीसीपी को रिलाएबल प्रोटोकॉल कहां जाता है? यूडीपी एक कनेक्शन लेस प्रोटोकॉल होता है क्योंकि यूडीपी डाटा ट्रांसमिशन के लिए कनेक्शन स्थापित नहीं करता और ना ही डाटा ट्रांसमिशन की गारंटी देता है। इसीलिए यूडीपी प्रोटोकोल को अनरिलायबल प्रोटोकॉल भी कहा जाता है, लेकिन यूडीपी की तुलना में टीसीपी धीमी गति से कार्य करता है।

इंटरनेट लेयर – What is Internet Layer

इंटरनेट लेयर कि यह लेयर नेटवर्क में कनेक्शन लेट कम्युनिकेशन उपलब्ध कराती है। इसका कार्य अलग-अलग नेटवर्क या पोस्ट को कम्युनिकेशन के लिए आपस में कनेक्ट करना होता है। नेटवर्क में पैकेट के मूवमेंट को कंट्रोल करना भी इसी लेयर का काम होता है। इसमें ट्रांसपोर्ट लेयर से छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में सूचना को प्राप्त कर डाटा को आईपी डाटा ग्राम के रूप में पारित किया जाता है। यह डाटा ग्राम पोस्ट तथा डेस्टिनेशन आईपी ऐड्रेस को कंटेन किए रहते हैं जिससे कि डाटा को आसानी से भेजा जाए और आसानी से रिसीव किया जा सके।

इस लेयर में कुछ मुख्य प्रोटोकॉल होते हैं जैसे इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) इंटरनेट कंट्रोल मैसेज प्रोटोकोल (ICMP), ऐड्रेस रेजोल्यूशन प्रोटोकोल (ARP), रिजर्व एड्रेस रेजोल्यूशन प्रोटोकॉल (RARP), और आखिरी है इंटरनेट ग्रुप मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (IGMP)।

नेटवर्क एक्सेस लेयर – What is Network Access Layer

ये लेयर आईपी मॉडल की सबसे नीचे वाली लेयर है। नेटवर्क एक्सेस लेयर यह बताती है कि किस प्रकार डाटा नेटवर्क में भेजा जाता है। इस लेयर में किसी न किसी नेटवर्किंग डिवाइसेज जैसे कि एनआईसी, वाईफाई, ब्लूटूथ, डीएसएल आदि का इस्तेमाल होता है जो विभिन्न कंप्यूटर सर्वर से कनेक्ट करने का काम करता है। यह हमारे कंप्यूटर को सर्वर कंप्यूटर या किसी अन्य कंप्यूटर से डाटा पैकेज से Send या Receive करने की सुविधा प्रदान करता है।

इस लेयर में जो डेटा होता है वो पैकेट के रूप में होता है और एक पैकेट को सोर्स से डेस्टिनेशन तक पहुंचाने का काम नेटवर्क लेयर का होता है। इस तरह से आईपी इंटरनेट के द्वारा डाटा को इन 4 लेयर की मदद से कम्युनिकेशन स्थापित कर सेंडर से रिसीवर तक और रिसीवर से सेंडर तक इंफॉर्मेशन पहुंचाने के कार्य को पूरा करता है

IP Address के प्रकार (Types Of IP Address in Hindi)

दोस्तों अब जानते है आईपी एड्रेस के प्रकार के बारे में जो को इस प्रकार है IP Address के 4 प्रकार होते है।

1.Public IP Addresses

2.Private IP Addresses

3.Static IP Addresses

4.Dynamic IP Addresses

Public IP Address

जब एक से अधिक मिलकर नेटवर्क बनाते है जब उनके बीच में 2 Different आईपी एड्रेस होते है एक तो खुद पब्लिक आईपी एड्रेस और दूसरा प्राइवेट आईपी एड्रेस। लेकिन जब कोई ISP किसी भी नेटवर्क राउटर को IP Address देता है जब वह Public IP Address कहलाता है। अब कभी भी किसी भी तरह का Device उस Router Connecting हो जायेगा, जब वह अपने Private IP Address को Router के Public IP Address के साथ जुड़ जाएगा और उसी समय उसका IP Address हाइड हो जाएगा और दूसरी तरफ सिर्फ Router का ही IP Address Show होगा।

Private IP Address

प्राइवेट आईपी एड्रेस को किसी भी Network के अंदर उपयोग में लिया जाता है प्राइवेट आईपी एड्रेस का उपयोग आपके एक Devices को Router और दूसरे किसी Devices के साथ Private Network में संचार करने के लिए किया जाता है

Static IP Address

जब किसी Devices में DHCP Activate नही होती या फिर उस डिवाइस में Support नही करती है तब वहा पर IP Address को कार्यभार के रूप में कार्य करता है और इसी को Static IP Address कहा जाता है।

Dynamic IP Address

जब एक IP Address को एक DHCP Server के तहत Assigned किया जाता है उसे ही Dynamic IP Address कहा जाता है।

IP के Versions (IPv4 vs IPv6) Hindi

अब बात करते है ip के versions के बारे में तो आइए जानते है कितने versions होते है IP के –

IPv4

IPv6

IPv4 Old Version है जबकि IPv6 इसका Updrade Version है लोगो द्वारा पूछा जाने वाला सवाल IPv6 version को क्यों बनाया गया इसकी क्या जरूरत थी, तो इसमें में आपको बता दू IPv6 को Upgraded करके लाया गया है और IPv6, IPv4 से ज्यादा संख्या की IP Address को Generate करता है

IPv6 को लाना का फैसला दुनिया में बढ़ती Device को देखकर लिया गया है। क्योंकि IPv4 अब ज्यादा IP Address को Generate नही कर पाता। समय के अनुसार IP Address की संख्या बढ़ती जा रही है IPv4 सिर्फ 4 Billions ही IP Address बना सकता है और वही IPv6 340 Trillion IP Address प्रदान कर सकता है।

IPv6 के आने के बाद दुनिया भर में IP Address की कमी नही होगी। अब एक इंसान चाहे हजारों डिवाइस को इंटरनेट के साथ जोड़ सकता है बिना परेशानी के।

IPv4 अपने address बनाते समय 32 bit numerical number में जो की Decimal Format में होते है।

IPv6 में Trillions में Address बनते है और यह Hexadecimal में दिखाई देते है जैसे – 4fte: 2800:7684:2:877:I4ff:rr:34:87tc

IPv4 और IPv6 में अंतर (Difference Between IPv4 and IPv6 In Hindi)

IPv4 Length 32 bits

IPv6 Length 128 bits

4 Billions IP Address Generate

340 Trillion IP Address Generate

IPv4 Range 0 to 255

IPv6 Range 0 to 65535

Total 4 Octet

Total 8 Octet

Ex. 191.155.11.22

Ex. 5FBB:1071:2540:1:765:G7FF:FE89:P78

What is My IP Address?

बहुत से लोग गूगल पर सर्च करते है की हम अपने डिवाइस का IP Address कैसे चेक करें? लेकिन में आपको बता दू आप अपने डिवाइस का IP Address बिलकुल आसान तरीके से कर सकते है चाहे फिर आप अपने टैबलेट, लैपटॉप, कंप्यूटर, फोन आदि का IP Address आसानी से चेक कर सकते है।

जिस भी डिवाइस का आप IP Address जानना चाहते है उस डिवाइस में आपको कोई भी एक Browser को ओपन कर लेना है

ओपन कर लेने के बाद आपको Search बार में What Is My IP लिख देना है और इंटर कर देना है जैसे ही आप इंटर करेंगे आपके सामने आपके डिवाइस का IP Address दिखाई देगा।

Q.मेरा आईपी एड्रेस क्या है?

सभी डिवाइसेज का IP अलग होता है अगर आप अपना IP Address जानना चाहते है तो आप अपने फोन के Browser को ओपन कर लेना है और उसमे आपको What Is My IP Address इतना लिख कर इंटर कर देना है उसके बाद आपके डिवाइस का IP Address दिखाई देने लगेगा

Q.आईपी एड्रेस के कितने क्लासेज होते है?

IP Address के 5 Classes होते है – Class A, Class B, Class C, Class D और Class E.

Q.आईपी एड्रेस में कितनी संख्या होती है।

IP Address में कुल 9 संख्या होती है जैसे My Ip Address 154.67.89.21 है यह संख्या 0 से लेकर 255 तक के बीच की होती है।

हम आशा करते हैं कि आज के इस लेख से आपने सीखा और समझा होगा IP Address क्या है कितने प्रकार के होते हैं और यह कैसे काम करता है अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो आप इस लेख को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों में शेयर कर सकते है। IP Address क्या है

अगर आपको इस लेख से संबंधित कोई भी सवाल पूछना चाहते है तो आप लेख के कॉमेंट सेक्शन में जाकर पूछ सकते है आपकी पूरी सहायता की जाएगी धन्यवाद।

 

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