महाशिवरात्रि व्रत कब है 2023 ! Mahashivratri Kab Hai ! व्रत कथा ! जाने शुभ मुर्हत ! पूजा विधि

महाशिवरात्रि व्रत कब है 2023 ! Mahashivratri Kab Hai ! व्रत कथा ! जाने शुभ मुर्हत ! पूजा विधि

हिन्दुओं के लिए वैसे तो हर त्यौहारों का महत्व होता हैं। लेकिन भोलेनाथ का व्रत (महाशिवरात्रि) Mahashivratri Kab Hai सबसे महत्वपूर्ण माना जाता हैं। हर सोमवार भोलेनाथ को समर्पित होता हैं। मासिक त्यौहारों में शिवरात्रि का व्रत एवम पूजन का महत्व होता हैं. वार्षिक त्यौहारों में महा शिवरात्रि, श्रावण माह, हरतालिका तीज आदि त्यौहारों का विशेष महत्व होता हैं।Mahashivratri Kab Hai

भोलेनाथ की पूजा का समय प्रदोष काल होता हैं। भोलेनाथ की आराधना दिन और रात्रि दोनों समय होती है। महाशिवरात्रि के दिन लोग उपवास रखते है। और पूरे विधि विधान के साथ भोलेनाथ की पूजा करते है !

महाशिवरात्रि व्रत कब है 2023 ! Mahashivratri Kab Hai ! व्रत कथा ! जाने शुभ मुर्हत ! पूजा विधिमहाशिवरात्रि 2023

महाशिवरात्रि कब मनाई जाती है

हिन्दू धर्म के प्रत्येक त्यौहार में से एक महाशिवरात्रि का पर्व माना जाता है। श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि और फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, हर साल महाशिवरात्रि बड़े ही हषोर्ल्लास और भोले की भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस बार 1 मार्च 2022 दिन मंगलवार को है महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा ।

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महाशिवरात्रि के दिन शुभ मुहूर्त ?

महाशिवरात्रि के दिन सबसे शुभ दिन होता है। 1 मार्च को ये शिवरात्रि सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर बुधवार 2 मार्च  सुबह 10 तक रहेगा। और रात्रि की पूजा शाम को 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 33 मिनट तक होगी। शिवरात्रि में रात के समय चार पहर की पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा का समय

● पहला पहर – 1 मार्च, 2022 शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक

● दूसरा पहर – 1 मार्च रात्रि 9:27 मिनट से 12: 33 मिनट तक।

● तीसारा पहर – 1 मार्च रात्रि 12:33 मिनट से सुबह 3 :39 मिनट तक।

● चौथा पहर – 2 मार्च सुबह 3:39 मिनट से 6:45 मिनट तक।

महाशिवरात्रि 2023 की पूजा विधि ?

भोलेनाथ की पुजा प्रदोष काल मे शाम के समय की जाती है। शिव रात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान कराकर केसर के 8 बार जल चढ़ाएं। शिव भगवान को चंदन का तिलक लगाया जाता है। दीपक जला कर उसके सामने बैठ कर भोलेनाथ का ध्यान किया जाता है

● शिव भगवान पर तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, मिठाई, फल, कमल गट्टे, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। ये सब चढ़ाने के बाद केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।

● पाठ में शिव अष्टक, शिव पुराण, शिव रुद्राष्टक, शिव स्तुति, शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर, शिव श्लोक आदि का पाठ भी किया जाता है।

● पूजा में सभी उपचार चढ़ाते समय ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।

प्रदोष व्रत कथा ?

पूर्वकाल में एक ब्राह्मणी अपने पति की मृत्यु के बाद निराधार होकर भिक्षा माँगने लग गयी। वह प्रातः होते ही अपने पुत्र को साथ लेकर बाहर निकल जाती और संध्या होने पर घर वापस लौटती। एक समय उसको विदर्भ देश का राजकुमार मिला जिसके पिता को शत्रुओ ने मारकर उसको राज्य से बाहर निकाल दिया था। इस कारण वह मारा-मारा फिरता था। ब्राह्मणी उसे अपने घर ले गयी और उसका पालन पोषण करने लगी एक दिन उन दोनों बालकों ने वन में खेलते-खेलते गन्धर्व कन्याओ को देखा। ब्राह्मण का बालक तो अपने घर आ गया लेकिन राजकुमार साथ नही आया क्योंकि वह अंशुमती नाम की गन्धर्व कन्या से बातें करने लगा था।

दूसरे दिन वह फिर अपने घर से आया लेकिन अंशुमती अपने माता-पिता के साथ बैठी थी। उधर ब्राह्मणी ऋषियों की आज्ञा से प्रदोष का व्रत करती थी। कुछ दिन बाद अंशुमति के माता-पिता ने राजकुमार से कहा कि तुम विदर्भ देश के राजकुमार धर्मगुप्त हो, हम श्री शंकर जी की आज्ञा से अपनी पुत्री अंशुमती का विवाह तुम्हारे साथ कर देते है। फिर राजकुमार का विवाह अंशुमती के साथ हो गया। बाद मे राजकुमार ने गन्धर्वराज की सेना की सहायता से विदर्भ देश पर अधिकार कर लिया और ब्राह्मण के पुत्र को अपना मंत्री बना लिया। यह सब उस ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत करने का फल उसे मिला था। उसी समय से प्रदोष व्रत संसार मे प्रतिष्ठित हुआ।

।।इति सौम्य प्रदोष व्रत कथा समाप्त।।

 

महाशिवरात्रि व्रत की कथा ?

कहते है चित्रभानु नाम के शिकारी की यह कथा शिव पुराण में मिलती है। चित्रभानु गरीब होने की वजह से अपने परिवार का पेट भरने के लिए जंगल मे जाकर शिकार करता था। और इसी कारण चित्रभानु को एक साहूकार से कर्ज लेना पड़ता था जिसे वह सही समय पर चुका नही पता था। इसी के चलते साहूकार ने अपना कर्ज वसूलने के लिए एक दिन के लिए चित्रभानु को अपने घर मे है कैद कर लिया था। चित्रभानु को पूरा दिन भूखा प्यासा रहना पड़ा था।

चित्रभानु भगवान शिव की पूजा करने लगा और फिर साहूकार ने चित्रभानु को छोड़ दिया जिस से चित्रभानु पैसे कमा कर ला सके और साहूकार को दे सके। इसके बाद चित्रभानु जंगल में शिकार ढूंढने के लिए दिन रात इधर उधर भटकता रहा। लेकिन फिर भी चित्रभानु को कोई भी शिकार नही मिला। हार थक कर चित्रभानु एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उसी बेल के पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था।

पेड़ पर बैठने की वजह से बेलपत्र टूट कर एक के बाद एक शिवलिंग पर गिरती रहीं। चित्रभानु पूरा दिन भूखा-प्यासा तो था ही और अनजाने में ही सही लेकिन चित्रभानु के द्वारा शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित हो गयी। चित्रभानु को रात के समय तलाब के पास एक गर्भवती हिरणी दिखाई देती हूं चित्रभानु उस गर्भवती हिरणी का शिकार करने के लिए जैसे ही तैयार हुआ तभी गर्भवती हिरनी ने चित्रभानु से बोली कि मेरे पेट मे बच्चा है।

और में उसको जन्म देने वाली हु। तब इसका जन्म हो जाएगा तब में खुद तुम्हारे पास आ जाऊंगी फिर मेरा शिकार कर लेना अभी मुझे जाने दो।  गर्भवती हिरणी की बात सुनकर चित्रभानु भावुक हो गए और उस हिरणी को जाने दिया इस तरह महाशिवरात्रि का प्रथम प्रहर भी बीत गया।

दूसरे पहर की पूजा कैसे समाप्त हुई ?

दूसरे पहर में भी चित्रभानु शिकार की तलाश कर रहा था कि तभी अचानक वहां से एक और हिरणी गुज़री। चित्रभानु हिरणी को देखते ही शिकार के लिए खड़ा हो गया। और तभी उस हिरणी ने भी चित्रभानु को कुछ कहा कि में अभी घर से अपने पति की खोज करने के लिए निकली हु। हिरणी ने कहा अभी मुझे यहाँ से जाने दो। हिरणी ने चित्रभानु से वादा किया कि जब मेरे पति मुझे मिल जाएंगे तब में तुम्हारे लिए वापिस लौटूंगी। चित्रभानु ने उसे भी जाने दिया। और बेलपत्र शिवलिंग पर गिरे और दूसरे प्रहर की पूजा भी समाप्त हो गई।

तीसरे चरण में पढ़े क्या हुआ ?

चित्रभानु शिकार ढूढ़ते-ढूढ़ते बहुत समय हो गया था लेकिन फिर कुछ समय बाद वहां से तीसरी हिरणी अपने बच्चों के साथ वहां से गुज़र रही थी। और चित्रभानु फिर से हिरणी के शिकार के लिए खड़ा हो गया। और तीसरी हिरणी ने चित्रभानु से कहा कि वह अपने बच्चों को अपने पिता के पास छोड़ कर तुम्हारे पास वापस आ जाएगी। तीसरी हिरणी की बात सुनकर चित्रभानु ने उसे भी छोड़ दिया। और चित्रभानु पूरा दिन उपवास में रहे और रात्रि को जागरण का आयोजन किया गया।

आखिरी हिरण को क्या देकर छोड़ दिया चित्रभानु ने

आखिर में वहाँ एक हिरण आया। हिरण को देख चित्रभानु शिकार के लिए तैयार हो गया। फिर हिरण ने चित्रभानु को कहा अगर तुमने तीन हिरणी और उनके बच्चों को शिकार कर दिया है तो तुम मेरा भी शिकार कर सकते हो। अगर तुमने उनका शिकार नही किया है तो मुझे भी जाने दो। हिरण ने चित्रभानु से कहा मैं तुमसे वादा करता हु में अपने पूरे परिवार के साथ तुम्हारे पास वापस आ जाऊंगा।

चित्रभानु ने पहले की तीन हिरणी की घटित घटना बताई हिरण सब सुनकर बोला। वह तीनों हिरणियां मेरी पत्नियां थीं। अगर तुमने मुझे मार दिया तो मेरी तीनों पत्नियां अपना वादा पूरा नहीं कर पाएंगी।

चित्रभानु को कैसे हुई मोक्ष और शिवलोक की प्राप्ति ?

चित्रभानु हिरण की सभी बातें सुनकर हिरण को जाने दिया। और इस तरह से चित्रभानु का ह्रदय परिवर्तन हो गया और उसका मन पवित्र हो गया। सारी रात चित्रभानु ने भगवान शिव की आराधना में लीन रहे। और भगवान शिव चित्रभानु से प्रसन्न हो गए। और हिरण ने अपना वादा निभाया और अपने पूरे परिवार के साथ चित्रभानु के पास पहुंच गया।

चित्रभानु हिरण और उसके सारे परिवार को देखकर बहुत ही ज्यादा प्रशन्न हुआ और हिरण के पूरे परिवार को जीवनदान देने का वचन लिया। और आखिर में चित्रभानु को मोक्ष की प्राप्ति हो गयी और मरने के बाद उसे शिवलोक में जगह मिली।।

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